विभागीय गतिविधियाँ

मछलीपालन विभाग की प्रमुख गतिविधियाँ

  1. मत्स्य कृषकों को उन्नत कि़स्म का मत्स्यबीज उपलब्ध कराया जाता है ।
  2. उन्नत मत्स्य पालन तकनीकी ग्रामीण स्तर तक फैलाने/प्रचार-प्रसार क्रियान्वयन हेतु विभागीय अधिकारी/कर्मचारी मैदानी क्षेत्र पर जाकर सलाह देते है ।
  3. मत्स्य विकास के विभिन्न कार्यो हेतु विभिन्न वर्ग के हितग्राहियों को व्यवसायिक बैंकों से ऋण उपलब्ध करा कर अनुदान दिया जाता है ।
  4. मछुआ कल्याण हेतु राष्ट्रीय कल्याणकारी योजनाएं यथा समूह बीमा, मछुआ आवास इत्यादि संचालित है । बचत-सह-राहत राष्ट्रीय योजना वर्ष 2002-03 से प्रांरभ की गई है ।
  5. नवीन मछुआ नीति 2008 के तहत 1000 हेक्टयर औसत जलक्षेत्र तक के तालाब/ जलाशय के मत्स्य विकास के अधिकार पंचायत राज संस्थाओं को अंतरित कर विभिन्न योजनाओं हेतु हितग्राही चयन, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता इत्यादि कार्य पंचायत के माध्यम से संचालित कराया जाता है ।
  6. मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को ग्रामीण तालाब 10 वर्षीय पट्टे पर देकर मछली पालन के साधन उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति हेतु कार्य करना तथा मत्स्योत्पादकता में वृद्धि करना ।
  7. प्रशासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से विभाग में सूचना का अधिकार लागू किया गया है, इसके तहत ग्रामीण तालाब/सिंचाई जलाशयों की जानकारी तथा पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों एवं अन्य अभिलेखों की जानकारी की छाया प्रति पृष्ठ रूपये 2/- शुल्क में नागरिको द्वारा प्राप्त की जा सकती है ।
  8. विभाग द्वारा सिटीजन चार्टर में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा निर्धारित की गई है जिसके तहत विभागीय योजना/कार्यक्रमों की जानकारी मत्स्याखेट, पट्टे प्रकरण, ऋण, अनुदान मछुआ प्रशिक्षण/अध्ययन भ्रमण तथा कल्याणकारी कार्यो में संबंधित सेवा 15-30 दिन में प्रदाय करना ।
  9. सूचना का अधिकार 2005 के तहत समस्त जिलों में लोक सूचना अधिकारी एवं सहायक लोक सूचना अधिकारी नियुक्त कर लागू किया गया है । संचालनालय स्तर पर श्री ओ.पी. सक्‍सैना, संयुक्‍त संचालक मत्‍स्‍योद्योग को लोक सूचना अधिकारी एवं श्री एच.के. खरे, उप संचालक मत्‍स्‍योद्योग को सहायक लोक सूचना अधिकारी नामांकित किया गया है ।