सिल्वरकार्प

वैज्ञानिक नाम :- हाइपोफ्थैलमिक्थिस माँलिट्रिक्स

सामान्य नाम :- मसिल्वर कार्प

भौगोलिक निवास एवं वितरण:-

सिल्वर कार्प मछली चीन देश की है, भारत में इसका सर्व प्रथम 1959 में प्रवेष हुआ। जापान की टोन नदी से उपहार के रूप में 300 नग सिल्वर कार्प फिंगरलिंग औसत वजन 1.4 ग्राम तथा औसतन 5 सेन्टीमीटर लंबाई व 2 माह आयु की मछली की एक खेप भारत में प्रथमतः केन्द्रीय अन्तः स्थलीय मछली अनुसंधान संस्थान कटक (उड़ीसा) लाई गई। इस मछली को लाने का उद्देष्य सीमित जगह से सस्ता मत्स्य भोजन प्राप्त करना था आज यह मध्य प्रदेश के अनेक तालाबों में पालन करने के कारण आसानी से उपलब्ध है। ।

पहचान के लक्षण:-

शरीर अगल बगल में चपटा सिर साधारण, मुहं बड़ा तथा निचला जबड़ा ऊपर की ओर हलका मुड़ा हुआ, आंखे छोटी तथा शरीर की अक्ष रेखा के नीचे, शल्क छोटे, पृष्ठ वर्ण का रंग काला धूसर तथा बाकी शरीर रूपहला (सुनहरा) रंग का होता है।

भोजन की आदत:-

यह जल के सतही तथा मध्य स्तर से अपना भोजन प्राप्त करती है। बनस्पति प्लवक इसका मुख्य पसंदीदा भोजन है, इसका भोजन नली शरीर की लंबाई से लगभग 6 से 9 गुणा बड़ी होती है। इसके लार्वा (बच्चे) 12 से 15 मिलीमीटर आकार के फ्राई, जन्तुप्लवक को अपना भोजन बनाती है, तथा बाद में यह वनस्पति प्लवक को खाती है।

अधिकतम साईज :-

इसका वृद्धि दर भारतीय प्रमुख सफर मछलियों की अपेक्षा बहुत तीब्रतर है सन् 1992-93 में मुंबई के पवइ्र्रलेक में आँक्सीजन की भारी कमी हो जाने के कारण बड़ी संख्या में सिल्वर कार्प मछलियाँ मर गई । इन मछलियों में अधिकतम आकार वाली सिल्वर कार्प की लंबाई 1.02 मीटर तथा वजन लगभग 50 किलोग्राम था इसकी बृद्धि प्रदेश में भी अच्छी देखी गई है। परन्तु इसकी उपस्थिति से कतला मछली की वृद्धि प्रभावित होती है। ।

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परिपक्वता एवं प्रजनन:-

चीन में यह 3 वर्षो में प्रजनन हेतु परिपक्व होती है, तथा भारत में यह 2 वर्ष की आयु में लैगिकं परिपक्वता प्राप्त कर लेती है। स्ट्रिपिंग विधि द्वारा इसका प्रेरित प्रजनन कराया जाता है। इन मछलियों का प्रजनन काल, चीन में अप्रेल से प्रारंभ होकर जून तक, वर्षाकाल में नदियों में, जापान में मई जून से प्रारंभ होकर जुलाई तक, रूस में बसंत ऋतु में बहते हुए पानी की धारा में ऊपर की ओर आ कर प्रजनन करती है, भारत में सन् 1961 में रूके हुए पानी पर मार्च के मध्य में परिपक्वता की स्थिति तथा जुलाई अगस्त में पूर्ण परिपक्व होने पर प्रजनन हेतु स्ट्रिप किया गया था। प्रदेश में इसका प्रजनन काल वर्षा ऋतु में माह जून से अगस्त तक होता है।

अंडा जनन क्षमता:-

इसकी अण्ड जनन क्षमता औसतन लगभग एक लाख प्रति किलोग्राम भार होती है, अण्डें पानी में डूबने वाले होते हैं, इसका आकार 1.35 मिलीमीटर व निषेचित होने पर पानी में फूलकर 4 से 7 मिलीमीटर व्यास के होते हैं। हेचिंग 28 से 31 डिग्रीसेन्टी ग्रेड पर 18 से 20 घंटे पर होता है, हेचलिंग का आकार 4.9 मिली मीटर तथा योक सेक भारतीय प्रमुख सफर के सामान दो दिनो में समाप्त हो जाता है।

आर्थिक महत्व:-

शीघ्र बृद्धिवाली मछलियों की आवष्यकता को पूर्ण करने के लिए सन् 1959 में जापान से लाई जाकर कटक अनुसंधान केन्द्र में रखी गई। प्रयोगों के आधार पर यह पाया गया है, कि भोजन संबंधी आदतों में कतला से समानता होते हुए भी पर्याप्त भिन्तायें हैं।

कार्प मछलियों के मिश्रित पालन विधि में सिल्वरकार्प एक प्रमुख प्रजाति के रूप में प्रयुक्त होती है। इसकी बाढ़ काफी तेज लगभग 6 माह के पालन में ही एक किलो ग्राम की हो जाती है। कतला की अपेक्षा सिल्वरकार्प में काटें कम होते हैं, भारतीय प्रमुख सफर की अपेक्षा इसका बाजार भाव कम है। स्वाद के कारण भारतीय प्रमुख सफर मछलियों की तरह मत्स्य पालको ने इसे बढ़ावा नहीं दिया।