ग्रासकार्प

वैज्ञानिक नाम :- टीनोफैरिंगोडोन इडेला

सामान्य नाम :- ग्रासकार्प

भौगोलिक निवास एवं वितरण:-

साइबेरिया एवं चीन देष की समषीतोष्ण जलवायु की, पेसिफिक सागर में मिलने वाली नदियां ग्रासकार्प की प्राकृतिक निवास स्थान है। यह मछली समषीतोष्ण तथा गर्म जलवायु के र्कइ देशों में प्रत्यारोपित की गई तथा अब यह उस देशों की प्रमुख भोजन मछली के रूप में जानी जाती भोज्य है। ग्रासकार्प मलू रूप से चीन देष की मछली है, इसे भारत में 22.11.1959 को हांगकागं से औसतन 5 माह आयु की 5.5 सेन्टीमीटर लम्बाई युक्त औसतन वजन 1.5 ग्राम की 383 अंगुलिकाएं प्राप्त कर लाई गई तथा भारत के केन्द्रीय अंतः स्थली मछली अनुसंधान संस्थान कटक (उडि़सा) के किला मत्स्य प्रक्षेत्र में रखी गई। यहां से आज यह भारत के समस्त प्रदेशों के जलाशयों एवं तालाबों में पाली जा रही है।

पहचान के लक्षण:-

शरीर लम्बा, हल्का सपाट मुंह चैडा तथा नीचे की ओर मुड़ा हुआ, निचला जबड़ा अपेक्षाकृत छोटा, आंखें छोटी, पृष्ठ पंख छोटा, पूंछी का भाग अगल बगल से चपटा तथा फैरेजियल दांत धांस पांत खाने के योग्य बने हुए। पीठ और आजू-बाजू का रंग हल्का रूपहला (सुनहरा चमकदार) तथा पेट सफेद।

भोजन की आदत:-

यह मुख्यतः जल के मध्य एवं निचले स्तरों में वास करती है, तथा आमतौर पर भोजन की तलाष में तालाबों के तटबंधो के करीब तैरती फिरती है। 150 मिलीमीटर से अधिक लंबी ग्रास कार्प विभिन्न प्रकार की जलीय एवं स्थलीय वनस्पतियां, आलू, अनाज, चावल की भूसी, गोभी तथा सब्जियों के पत्ते एवं तने को खाती है । विभिन्न वैज्ञानिकों के अध्ययन के दौरान पाया गया कि ग्रासकार्प का लार्वा केवल जन्तु प्लवक खाता है, तथा 2 से 4 से.मी. लम्बाई का बच्चा बुल्फिया वनस्पति खाता है। भारत में बड़ी ग्रास कार्प मछलियों पर देखा गया कि 1 किलोग्राम मछली प्रतिदिन 2.5 किलो से3 किलोग्राम तक हाईड्रिला वनस्पति को खा जाती है।

प्राथमिकता के आधार पर ग्रासकार्प द्वारा खाई जाने वाली जलीय वनस्पति निम्नानुसार हैः-

  1. हाईड्रिला
  2. नाजास
  3. सिरेटोफाईलम
  4. ओटेलिया
  5. बेलीसनेरिया
  6. यूट्रीकुलेरिया
  7. पोटेमाजेटान
  8. लेम्ना
  9. ट्रापा
  10. बुल्फिया
  11. स्पाईरोडेला
  12. ऐजोला

अधिकतम साईज :-

ग्रासकार्प की वृद्धि दर मुख्यतः संचयन की दर व भोजन की मात्रा जो उसे प्रतिदिन दी जाती है पर निर्भर करती है। इसकी वृद्धि काफी तेज होती है एक वर्ष में यह अममू न 35 से 50 सेन्टीमीटर की लंबाई तथा 2.5 किलोग्राम से अधिक वजन की हो जाती है। ।

grass-carp-2

परिपक्वता एवं प्रजनन:-

ग्रास कार्प किस आयु तथा आकार में परिपक्व होती है यह भिन्नता उसके प्राकृतिक निवास तथा ट्रांसप्लांटेड निवास पर भिन्न. भिन्न है। भारत वर्ष में ग्रास कार्प नर मछली 2 वर्ष में तथा मादा 3 वर्ष में लैगिकं परिपक्वता प्राप्त कर लेती है ग्रास कार्प वर्ष में एक ही बार प्रजनन करती है, यद्धपि रूस में तापक्रम के उतार चड़ाव के कारण एमुर नदिय तंत्र में कुछ मछलियां पारी पारी से प्रजनन करती पाई गई है। आज भारत के लगभग सभी प्रदेशों में ग्रास कार्प का पोखरांे में स्ट्रिपिगं विधि द्वारा प्रेरित प्रजनन कराया जा रहा है।

अंडा जनन क्षमता:-

इसकी अण्डजनन क्षमता औसतन प्रति किलो ग्राम भार 75000 से 100000 अण्डे तक आंकी गई है।ग्रास कार्प के अण्डों का आकार गोलाकार 1.27 मिलीमीटर ब्यास जो फर्टीलाईज्ड होकर पानी में फलू कर 4.58 मिलीमीटर ब्यास का हो जाता है। भारतीय परिस्थितियों के अनुसार हेचिंग 18 से 20 घंटे एवं 23 से 32 डिग्री सेंटीग्रेट पर होता है, हेचलिंग का आकार 5.86 से 6.05 मिलीमीटर आंका गया है। हेचिंग होने के 2 दिन बाद पीतक थैली (याँक सेक) पूर्णतः समाप्त हो जाता है।

आर्थिक महत्व:-

ग्रास कार्प मलू रूप से चीनी देष की मछली है, तथा जलीय परिवेष में खर-पतवार के नियंत्रण के लिए यह विष्व के कई देशों में ले जाई गई हैं प्रयोगों के आधार पर यह देखने में आया कि कार्प मछलियों के मिश्रित/सधन पालन प्रणाली के अंतर्गत इसका समावेष काफी लाभकारी होता है एवं जल पौधों के नियंत्रण के लिए यह काफी उपयोग है। संवर्धन तालाबों में तालाब के क्षत्रे फल के आधार पर इसकी संचयन संख्या निर्धारित की जाती है। एक वर्ष के पालन अवधि में उपलब्ध कराए गए भोजन के अनुरूप यह 2 से 5 किलोग्राम की हो जाती है। ग्रास कार्प का बाजार भाव अच्छा है, और ग्राहक इसे खरीदना पसंद करते हैं।